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नगर आयुक्त की सख्ती: चीनी मांझे पर कार्रवाई और स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों की समीक्षा
हरिद्वार नगर निगम हरिद्वार के नगर आयुक्त नंदन कुमार (आईएएस) ने बुधवार को सभी मुख्य सफाई निरीक्षकों एवं सुपरवाइजरों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में शहर में प्रतिबंधित चीनी मांझे के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई, स्वच्छता व्यवस्था तथा आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों की गहन समीक्षा की गई।नगर आयुक्त ने कहा कि चीनी मांझा केवल जानलेवा दुर्घटनाओं और जनहानि का कारण नहीं बन रहा है, बल्कि यह शहर में गंदगी और प्लास्टिक प्रदूषण का भी बड़ा स्रोत है। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक व नायलॉन से बना चीनी मांझा लंबे समय तक नष्ट नहीं होता और उपयोग के बाद बिजली के खंभों, पेड़ों, नालियों, छतों व सड़कों पर लटककर शहर की सुंदरता और स्वच्छता को प्रभावित करता है। नालियों में फंसने से जल निकासी बाधित होती है, जिससे जलभराव, दुर्गंध और गंदगी की समस्या बढ़ती है। साथ ही पशु-पक्षी इसके कारण घायल होते हैं।नगर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि चीनी मांझे की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर कठोर प्रवर्तन कार्रवाई की जाए। उन्होंने सभी सैनिटरी इंस्पेक्टरों को निर्देशित किया कि चीनी मांझे की जब्ती को प्लास्टिक नियंत्रण एवं गंदगी के विरुद्ध चल रहे अभियानों से जोड़ा जाए। गंदगी फैलाने वालों पर नियमित चालान, प्रतिबंधित प्लास्टिक के विरुद्ध सघन अभियान, सार्वजनिक स्थलों से लटके मांझे की त्वरित सफाई तथा आमजन को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए।बैठक में स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर फील्ड स्तर की तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया। नगर आयुक्त ने कहा कि स्वच्छता, प्लास्टिक नियंत्रण और जनसुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े विषय हैं और इन्हें एकीकृत रूप से लागू किया जाना चाहिए।
बैठक में एसएनए ऋषभ उनियाल, मुख्य सैनिटरी निरीक्षक मनोज कुमार, धीरेन्द्र सेमवाल, अर्जुन सिंह, संजय शर्मा, श्रीकांत, विकास चाचर, विकास चौधरी, सुनील मलिक एवं सुरेन्द्र कुमार उपस्थित रहे। नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम का लक्ष्य हरिद्वार को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
हरिद्वार नगर निगम हरिद्वार के नगर आयुक्त नंदन कुमार (आईएएस) ने बुधवार को सभी मुख्य सफाई निरीक्षकों एवं सुपरवाइजरों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में शहर में प्रतिबंधित चीनी मांझे के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई, स्वच्छता व्यवस्था तथा आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों की गहन समीक्षा की गई।नगर आयुक्त ने कहा कि चीनी मांझा केवल जानलेवा दुर्घटनाओं और जनहानि का कारण नहीं बन रहा है, बल्कि यह शहर में गंदगी और प्लास्टिक प्रदूषण का भी बड़ा स्रोत है। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक व नायलॉन से बना चीनी मांझा लंबे समय तक नष्ट नहीं होता और उपयोग के बाद बिजली के खंभों, पेड़ों, नालियों, छतों व सड़कों पर लटककर शहर की सुंदरता और स्वच्छता को प्रभावित करता है। नालियों में फंसने से जल निकासी बाधित होती है, जिससे जलभराव, दुर्गंध और गंदगी की समस्या बढ़ती है। साथ ही पशु-पक्षी इसके कारण घायल होते हैं।नगर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि चीनी मांझे की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर कठोर प्रवर्तन कार्रवाई की जाए। उन्होंने सभी सैनिटरी इंस्पेक्टरों को निर्देशित किया कि चीनी मांझे की जब्ती को प्लास्टिक नियंत्रण एवं गंदगी के विरुद्ध चल रहे अभियानों से जोड़ा जाए। गंदगी फैलाने वालों पर नियमित चालान, प्रतिबंधित प्लास्टिक के विरुद्ध सघन अभियान, सार्वजनिक स्थलों से लटके मांझे की त्वरित सफाई तथा आमजन को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए।बैठक में स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर फील्ड स्तर की तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया। नगर आयुक्त ने कहा कि स्वच्छता, प्लास्टिक नियंत्रण और जनसुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े विषय हैं और इन्हें एकीकृत रूप से लागू किया जाना चाहिए।
बैठक में एसएनए ऋषभ उनियाल, मुख्य सैनिटरी निरीक्षक मनोज कुमार, धीरेन्द्र सेमवाल, अर्जुन सिंह, संजय शर्मा, श्रीकांत, विकास चाचर, विकास चौधरी, सुनील मलिक एवं सुरेन्द्र कुमार उपस्थित रहे। नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम का लक्ष्य हरिद्वार को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
