चंडीघाट –नीलधारा पार्किंग में अव्यवस्थाओं का अंबार! न साफ-सफाई, न रोशनी, न सीसीटीवी, न शौचालय; 15 दुकानों की अनुमति की आड़ में सैकड़ों से वसूली का आरोप।

चंडीघाट –नीलधारा पार्किंग में अव्यवस्थाओं का अंबार!

 

न साफ-सफाई, न रोशनी, न सीसीटीवी, न शौचालय; 15 दुकानों की अनुमति की आड़ में सैकड़ों से वसूली का आरोप।

 

रिपोर्ट अरुण कश्यप

 

हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध कांवड़ मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाई गई चंडीघाट-नीलधारा पार्किंग स्वयं अव्यवस्थाओं का केंद्र बनती दिखाई दे रही है। सिंचाई खंड, हरिद्वार द्वारा आवंटित इस पार्किंग में मूलभूत सुविधाओं का अभाव गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पार्किंग स्थल पर न पर्याप्त साफ-सफाई है, न रात के समय समुचित प्रकाश व्यवस्था, न सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और न ही श्रद्धालुओं व दुकानदारों के लिए शौचालय की व्यवस्था। सिंचाई विभाग द्वारा किए गए अनुबंध में केवल 15 अस्थायी दुकानों तथा 15 रेहड़ी-पटरी लगाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन मौके पर सैकड़ों दुकानें संचालित हो रही हैं। आरोप है कि इन दुकानों से प्रतिदिन 200 से 800 रुपये तक शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि व्यवस्थाओं के नाम पर कुछ भी दिखाई नहीं देता।

शाम ढलते ही पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है। पर्याप्त रोशनी और सीसीटीवी कैमरों के अभाव में यहां चोरी, झपटमारी तथा अन्य आपराधिक घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। कांवड़ मेले के दौरान पार्किंग क्षेत्रों और अस्थायी बाजारों से मोबाइल, नकदी और अन्य सामान चोरी होने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने से जांच प्रभावित होती है और आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

पार्किंग संचालक कुलदीप चौधरी का कहना है कि अभी सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह नहीं हो पाई हैं और जल्द ही आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। हालांकि कांवड़ मेला आधा बीत जाने के बाद भी व्यवस्थाएं अधूरी रहने से श्रद्धालुओं, दुकानदारों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

कुलदीप, अर्जुन , प्रयास आदि का कहना है कि करोड़ों रुपये के राजस्व वाले कांवड़ मेले में पार्किंग जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में सुरक्षा, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी गंभीर लापरवाही है। उन्होंने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से तत्काल सीसीटीवी कैमरे, हाईमास्ट लाइटें, बैरियर, शौचालय तथा नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ अनुमति से अधिक संचालित दुकानों और कथित अवैध वसूली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।