रिपोर्ट दिशा शर्मा जनहित इंडिया
करियर में आया थोड़ा ढलान तो मुस्लिम तो सितारे बोले—‘माय नेम इज़ ख़ान’
*तर्क वितर्क:* फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है। जैसे ही किसी स्टार के करियर में थोड़ी-सी भी ढलान आती है, वह खुद को विवादों, बयानों या पहचान के नए विमर्श से जोड़ने लगता है। पहले अमीर तो अब रहमान इसी राग को अलाप रहे हैं,
हालात ऐसे बन रहे हैं कि बॉक्स ऑफिस पर असफलता या चमक फीकी पड़ते ही कुछ सितारे अपनी पहचान को लेकर भावनात्मक या राजनीतिक बयान देने से नहीं चूकते—मानो सहानुभूति और सुर्खियों के सहारे वापसी की कोशिश हो।
सोशल मीडिया के दौर में यह रणनीति और भी तेज हो गई है। एक बयान, एक पोस्ट या एक इंटरव्यू—और कलाकार फिर से चर्चा के केंद्र में आ जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह तरीका लंबे समय तक टिकाऊ है? फिल्म समीक्षकों का मानना है कि दर्शक अब इन हथकंडों को समझने लगे हैं और केवल कंटेंट व अभिनय के दम पर ही कलाकार को स्वीकार करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहचान और भावनाओं की आड़ लेकर करियर को दोबारा चमकाने की कोशिश भले ही तात्कालिक सुर्खियाँ दिला दे, लेकिन यह कला और सिनेमा के मूल उद्देश्य से भटकाव भी है। असली कसौटी आज भी वही है—अच्छी कहानी, दमदार अभिनय और ईमानदार मेहनत।
