दो अस्पतालों से रेफर गंभीर नवजात की एमसीएच विंग एनपीपीएल में बची जान, छह दिन चला उपचार फेफड़ों में दूध जाने से बिगड़ी थी हालत, तीन दिन वेंटिलेटर और तीन दिन सेमी-वेंटिलेटर पर रखकर किया इलाज

 

रिपोर्ट कालू वर्मा देश जनहित

हरिद्वार। गंभीर हालत में दो अस्पतालों से रेफर होकर एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल पहुंचे एक नवजात शिशु की जान चिकित्सकों की टीम ने छह दिनों के गहन उपचार के बाद बचा ली। बच्चे की हालत बेहद नाजुक थी। उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी और शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण नीलापन दिखाई दे रहा था। छह दिनों तक लगातार चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ, जिसके बाद उसे माता-पिता को सौंप दिया गया।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कामिनी के नवजात शिशु को गंभीर अवस्था में एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल लाया गया था। अस्पताल पहुंचने के समय बच्चा हांफ रहा था और उसके शरीर पर सायनोसिस यानी ऑक्सीजन की कमी के कारण नीलापन दिखाई दे रहा था। चिकित्सकीय जानकारी के मुताबिक, फेफड़ों में दूध चले जाने के कारण बच्चे की सांस लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई थी और उसकी स्थिति गंभीर श्वसन संकट तक पहुंच गई थी।

 

तीन दिन वेंटिलेटर पर रखकर किया उपचार

 

नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में चिकित्सकों ने बच्चे की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी और सांस लेने में सहायता के लिए उसे वेंटिलेटर पर रखा।

 

बच्चे को पहले तीन दिनों तक वेंटिलेटर पर उपचार दिया गया। इसके बाद हालत में सुधार होने पर अगले तीन दिनों तक सेमी-वेंटिलेटर सपोर्ट के माध्यम से उपचार जारी रखा गया। छह दिनों के गहन उपचार और लगातार चिकित्सकीय निगरानी के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ और उसे स्वस्थ अवस्था में परिजनों को सौंप दिया गया।

 

डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने निभाई अहम भूमिका

 

नवजात के उपचार में डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में एनआईसीयू टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपचार करने वाली टीम में डॉ. मोहम्मद सलमान, डॉ. शुभम, डॉ. अक्षत और डॉ. स्नेहा शामिल रहे। चिकित्सकों की टीम ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए लगातार देखभाल की और उसे आवश्यक श्वसन सहायता उपलब्ध कराई।

 

नेहरू कॉलोनी, सलेमपुर का निवासी है परिवार

 

नवजात के पिता राहुल कुमार हैं। उनका परिवार हरिद्वार के नेहरू कॉलोनी, सलेमपुर क्षेत्र में रहता है। बच्चे की हालत में सुधार होने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।

 

यह मामला नवजात शिशुओं की गंभीर स्थिति में समय पर विशेषज्ञ उपचार, एनआईसीयू की सुविधाओं और निरंतर चिकित्सकीय निगरानी के महत्व को रेखांकित करता है। गंभीर अवस्था में जन्मे या बीमार नवजात को समय पर उचित चिकित्सा सहायता मिलना उसके उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।