मुस्कुराइए… आप आज पहाड़ों पर नहीं हैं, भीषण जाम और धक्का-मुक्की बना कई सैलानियों के लिए नए साल का ‘तोहफा’
रिपोर्ट: अरुण कश्यप
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यदि आप इस बात से दुखी हैं कि इस बार नववर्ष मनाने पहाड़ों का रुख नहीं कर सके, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। उल्टा आपको खुश होना चाहिए कि आप भीषण जाम, भारी भीड़ और धक्का-मुक्की से बच गए। नए साल के मौके पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अधिकांश प्रमुख हिल स्टेशनों पर हालात बेहद खराब नजर आए।
शिमला, मनाली, चमोली, सोलन, ऋषिकेश, मसूरी और देहरादून सहित कई पर्यटन स्थलों पर सुबह से ही सड़कों पर लंबा जाम लगा रहा, जो देर शाम तक जारी रहा। पहाड़ी क्षेत्रों में राष्ट्रीय व राज्य मार्ग संकरे होने के कारण वाहनों का दबाव अचानक बढ़ते ही यातायात पूरी तरह ठप हो गया। कई जगह पर्यटक घंटों तक जाम में फंसे रहे, जिससे उनका नववर्ष स्वागत जाम में ही बीत गया।
हालात ऐसे रहे कि कई परिवारों को खाने-पीने और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ी। पुलिस और प्रशासन ने यातायात सुचारू रखने के प्रयास किए, लेकिन सीमित संसाधन और कम रास्तों की उपलब्धता के चलते स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी।
फिलहाल नववर्ष के लिहाज से हरिद्वार को सबसे सुरक्षित और अपेक्षाकृत जाम-मुक्त क्षेत्र माना जा रहा है। इसके अलावा ऋषिकेश और देहरादून के कुछ हिस्सों में भी यातायात सामान्य रहा, जबकि अन्य पहाड़ी इलाकों में जाम ने पर्यटकों का उत्साह फीका कर दिया।
दरअसल, बीते एक दशक में नए साल पर पहाड़ों की ओर बढ़ता पर्यटक रुझान अब जाम की बड़ी वजह बन चुका है। ऐसे में अगर आप घर पर बैठकर नववर्ष मना रहे हैं, तो मुस्कुराइए—कम से कम आप पहाड़ों के जाम में फंसे नहीं हैं।
