विभाग प्रमुख के आदेशों को ठेंगा! 15 दिन बाद भी अधिशासी अभियंता लापरवाह, जल संस्थान में मुफ्त बिजली का खेल जारी,

रिपोर्ट अरुण कश्यप जनहित इंडिया

विभाग प्रमुख के आदेशों को ठेंगा!

 

15 दिन बाद भी अधिशासी अभियंता लापरवाह,

जल संस्थान में मुफ्त बिजली का खेल जारी,

 

हरिद्वार। उत्तराखंड जल संस्थान में अनुशासन और जवाबदेही की हालत इस कदर बदतर हो चुकी है कि अब विभाग के मुखिया मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) के आदेश भी अधीनस्थ अभियंताओं के लिए मजाक बनकर रह गए हैं। विभाग पर बढ़ते वित्तीय बोझ को कम करने के उद्देश्य से जारी किए गए स्पष्ट आदेशों के बावजूद हरिद्वार में अधिशासी अभियंताओं की लापरवाही उजागर हो गई है।

दरअसल, जल संस्थान के प्रमुख मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह ने 24 फरवरी को सख्त आदेश जारी करते हुए कहा था कि सरकारी आवासों में रह रहे सभी कर्मचारी अपने-अपने नाम से अलग बिजली कनेक्शन लें। आदेश में यह भी साफ किया गया था कि एक सप्ताह के भीतर यदि किसी कर्मचारी ने निजी कनेक्शन नहीं लिया, तो उसका बिजली कनेक्शन काट दिया जाए। इसके लिए अधीक्षण अभियंताओं को सीधे जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

 

लेकिन हैरानी की बात यह है कि आदेश जारी हुए 15 दिन से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी हरिद्वार की दोनों प्रमुख शाखाओं में अधिशासी अभियंता लापरवाही का चोला ओढ़े बैठे हैं। न तो कनेक्शन कटे और न ही तय समयसीमा में नए कनेक्शन लग पाए।

 

आकलन के अनुसार, हरिद्वार गंगा अनुरक्षण शाखा में ही 50 से अधिक सरकारी आवास ऐसे हैं जहां आज भी विभाग की बिजली मुफ्त में जलाई जा रही है। दोनों शाखाओं को मिलाकर अनुमान है कि हर महीने लगभग 10 लाख रुपये की बिजली का भार कर्मचारियों द्वारा उपयोग किया जा रहा है, जिसका भुगतान जल संस्थान को करना पड़ रहा है।

 

सवाल यह है कि जब विभाग के मुखिया स्वयं सख्त आदेश जारी कर चुके हैं, तो फिर किसके संरक्षण में अधिशासी अभियंता आदेशों की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं? क्या विभागीय मिलीभगत के चलते सरकारी खजाने पर डाका डाला जा रहा है?

 

यदि यही रवैया रहा तो जल संस्थान पर आर्थिक बोझ और बढ़ेगा, जिसकी कीमत अंततः आम उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ेगी।

 

 

 

विपिन चौहान, प्रभारी अधिशासी अभियंता, जल संस्थान हरिद्वार

“हमारी शाखा में कुल 153 कर्मचारी हैं, जिनमें 37 स्थायी कर्मचारियों को सरकारी आवास आवंटित हैं। फरवरी के अंत तक सभी के बिजली कनेक्शन कर दिए जाएंगे।”

 

हरीश बंसल, अधिशासी अभियंता, अनुरक्षण शाखा गंगा

“हम लोग तैयारी कर रहे हैं। जल्द ही कनेक्शन काटने और नए कनेक्शन लगाने की कार्रवाई की जाएगी।”

 

यशवीर मल, अधीक्षण अभियंता, उत्तराखंड जल संस्थान हरिद्वार

“सीजीएम साहब का पत्र मुझे भी प्राप्त हुआ था। मैंने अपने दोनों अधिशासी अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं।”