हर की पौड़ी पर कृष्ण जन्मोत्सव की धूम, भव्य झांकियों ने मोहा श्रद्धालुओं का मन गऊघाट-सुभाष घाट पर 58वां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न, रात 12 बजे केक काटकर मनाया गया जन्मोत्सव, हुई भव्य आतिशबाजी

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर हर की पौड़ी के समीप गऊघाट-सुभाष घाट पर आयोजित 58वें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिला। रंग-बिरंगी रोशनी से सजे घाट, आकर्षक धार्मिक झांकियां और मथुरा-वृंदावन एवं बरसाना से पहुंचे कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

 

महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गऊघाट-सुभाष घाट पहुंचे। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एवं मेयर किरण जैसल ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि जगदीश लाल पाहवा, बृजभूषण विद्यार्थी, अनिरुद्ध भाटी एवं डॉ. विशाल गर्ग सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

 

राधा-कृष्ण की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

 

महोत्सव में मथुरा, वृंदावन और बरसाना से पहुंचे विशेष टीवी कलाकारों ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को देर रात तक बांधे रखा। राधा-कृष्ण की भव्य झांकी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। इसके साथ ही भगवान विष्णु के विराट स्वरूप, भगवान शिव-पार्वती और नौ दुर्गा की आकर्षक झांकियों ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा।

 

आयोजन में प्रस्तुत किया गया डरावना भूत दृश्य भी दर्शकों के बीच खासा आकर्षण का केंद्र रहा। झांकियों और प्रस्तुतियों को देखने के लिए घाट पर देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।

 

रात 12 बजे गूंजे श्रीकृष्ण के जयकारे

 

रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का समय होते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर केक काटकर जन्मोत्सव मनाया गया, जिसके बाद भव्य आतिशबाजी की गई। रंग-बिरंगी आतिशबाजी से गऊघाट और आसपास का क्षेत्र रोशनी से जगमगा उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते हुए जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं।

 

58 वर्षों से चली आ रही है परंपरा

 

कार्यक्रम संयोजक राजेंद्र वधावन ‘राजू’ ने बताया कि गऊघाट-सुभाष घाट पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन लगातार धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के साथ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस महोत्सव को उत्तराखंड सरकार द्वारा वर्ष 2015 में प्रथम पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। हर वर्ष की तरह इस बार भी आयोजन को भव्य और आकर्षक स्वरूप दिया गया।

 

श्रीकृष्ण के संदेश को जीवन में उतारने का आह्वान

 

इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और मानवता की रक्षा का संदेश देने वाला पर्व है। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा प्रदान करती हैं।

 

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि हरिद्वार की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

 

मेयर किरण जैसल ने कहा कि धर्मनगरी में आयोजित होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं। उन्होंने आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

 

कार्यक्रम संयोजक राजेंद्र वधावन ‘राजू’ ने सभी अतिथियों का स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन उप संयोजक गोपाल कृष्ण गुलाटी ने किया।

 

महोत्सव में आनंद विरमानी, सतीश काका, अरविंद बबली, महेश जैन, महेंद्र अरोड़ा, धीरज अरोड़ा, सुमित शर्मा, बादल गोस्वामी, पंकज कुमार लाली, नितिन कुमार नीटू, कमल खड़का, ममता वधावन, कुसुम लता, प्रिया वधावन, चिराग वधावन, प्रिंस वधावन, मणि कर्ण खत्री, ऋषभ वधावन, गोपाल मोती, प्रेम कुमार बहोत, सुनील वधावन, विशाल ठाकुर, आशु वधावन, विभांशु रानू, आशीष शर्मा, सम्मी अरोड़ा, रमेश चंद शर्मा, मोनू शर्मा, अनुपम त्यागी, प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष संजीव नैय्यर, शहर अध्यक्ष राजीव पराशर, अरुण कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।